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मन रूपी विकार को जीतना ही आत्म नियंत्रण है–,,यशस्वनि माताजी,,

एडिटर/संपादक:-तनीश गुप्ता,खण्डवा

मन रूपी विकार को जीतना ही आत्म नियंत्रण है–,,यशस्वनि माताजी,,

विराजमान माताजियों द्वारा प्रतिदिन प्रात काल हो रहे हैं प्रवचन,

खंडवा ।। साधु संत चलते फिरते तीर्थ समान होते हैं जिस नगर गांव में विराजमान होते हैं,वहां धर्म की प्रभावना होती है, नगर में जब भी साधु संतों का आगमन है उनके दर्शन एवं उनके प्रवचनों का लाभ प्रत्येक व्यक्ति ने अपने जीवन के कल्याण के लिए अवश्य लेना चाहिए, समाज के सचिव सुनील जैन बताया कि जैन संत पूरे देश में पदयात्रा कर धर्म की प्रभावना करते हैं,इन दिनों खंडवा में यशस्वनी माताजी,मनस्वनि माताजी जैन छात्रावास में विराजमान हें, प्रतिदिन 8:00 बजे माताजी के प्रवचन एवं आहार चर्या एवं दोपहर में तत्व चर्चा हो रही है, बुधवार को प्रातः 8:30 बजे जैन छात्रवास मोघट रोड़ खंडवा में विराजमान आर्यिका यशस्वनि माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संसार के भोगों से विरक्ति होना मोक्ष का मार्ग है।दूसरों को पीड़ा देना उसमे सुख मानना नरक और कर्म बंद का कारण है।जिसने कर्मो के विपाक को सोच लिया वह कभी दुखी नहीं रहता।इंद्रियों का हेडक्वार्टर मन है,मन रूपी विकार को जितना है मुक्ति का मार्ग है ।मन की चंचलता को मिटाना चाहिए।राग को छोड़ोगे तो संसार रूपी वन में भटकने से बचोगे।आज के समय मे व्यक्ति विचारों के परिवर्तन के कारण संस्कारो को भूलते जा रहा है। हम सभी पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने में लगे हुए है।मनुष्य गति से ही ध्यान,और निर्वाण होता है।जीवों को अभयदान देना हमारा कर्तव्य मानना चाहिए।हम सभी धर्म के अनुसार अपने जीवन को जिये। रत्नत्रय की प्राप्ति के लिये धर्म मिला है उसका सदुपयोग करना चाहिए। मुनी सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन, प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि आर्यिका माताजी द्वारा प्रतिदिन दोपहर 3 से अष्टपाहुड ग्रन्थ पर कक्षा ली जा रही है, वही शाम 7 से 8 आरती,गुरुभक्ति,प्रश्न मंच माताजी के संघस्थ श्रद्धा दीदी के द्वारा किये जा रहे है। माताजी के साथ संघस्थ मनस्वनि माताजी भी विराजमान है। प्रवचन मेंमहेश जैन,विजय सेठी, दिलीप पहाड़िया,प्रदीप जैन बोरगांव,मनीष जैन,अविनाश जैन,पंकज जैन महल, दौलतराम जैन,अशोक पाटनी कांतिलाल जैन सुनील जैन प्रेमांशु जैन आदि समाजजन उपस्थित थे।इस अवसर पर मंगलाचरण सुनीता अशोक पाटनी ने किया,जिनवाणी स्तुति का वाचन रेखा महेश जैन ने किया,आहारचर्या में सहयोगी अर्पित जैन,रमेश सेठी, चंदाबाई जैन,सुभद्रा जैन,रक्षा जैन,सुधा जैन रहे व धर्मसभा में संचालन पंकज जैन महल वाले ने किया।

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